अनुशासन और ज्ञान का संगम: राष्ट्र निर्माण की कुंजी

September 29, 2020

यह वर्दी मेरे अस्तित्व का हिस्सा है। इसने मुझे सिखाया है कि शक्ति के साथ-साथ ‘ज्ञान’ और ‘विनम्रता’ भी एक सैनिक के सबसे बड़े हथियार होते हैं। यह क्षण, जहाँ विचारों और साहित्य का आदान-प्रदान हो रहा है, मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मेरा मानना है कि देश को आगे ले जाने के लिए फौज के कड़े अनुशासन और समाज की बौद्धिक शक्ति (Intellectual Power) का मिलन होना आवश्यक है। हम ‘नवभारत चेतना संस्थान’ में इसी फौजी कार्यशैली, पारदर्शिता और प्रतिबद्धता को लेकर आए हैं।

जब शक्ति और ज्ञान मिलते हैं, तब राष्ट्र का निर्माण होता है।

एक हाथ में अनुभव और दूसरे में सहयोग लेकर ही हम बदलाव ला सकते हैं। समाज के हर वर्ग, चाहे वह विचारक हो, सैनिक हो या सामान्य नागरिक, सबको एक मंच पर आना होगा। यह तस्वीर प्रतीक है उस साझी जिम्मेदारी की, जो हम सब पर है—भारत की संस्कृति को समझने की और उसे संजोने की। हम इसी ज्ञान और सहयोग के रास्ते पर चलकर भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए संकल्पित हैं।