मेरे जीवन की असली कमाई यही मुस्कान है। जब मैं इन नन्हें बच्चों के बीच होता हूँ, तो फौज की कड़क वर्दी के पीछे छिपा एक भावुक इंसान बाहर आ जाता है। यह तस्वीर गवाह है उस आत्मीयता की, जो मुझे इन बच्चों से जोड़ती है।
ये बच्चे केवल विद्यार्थी नहीं हैं, ये भारत की ऊर्जा के छोटे-छोटे स्रोत हैं। इनके चेहरों पर यह चमक और शांति देखकर मुझे विश्वास हो जाता है कि यदि हम इन्हें सही खाद-पानी (शिक्षा और संस्कार) दें, तो यही बच्चे कल वटवृक्ष बनकर भारत को अपनी छाँव देंगे।

खिलता हुआ बचपन, मुस्कुराता हुआ भारत
नवभारत चेतना संस्थान का उद्देश्य केवल मदद करना नहीं, बल्कि खुशियां बांटना है। हम चाहते हैं कि गरीबी या अभाव किसी भी बच्चे के बचपन को मुरझाने न दे।
मेरा प्रयास है कि हर बच्चे को ऐसा माहौल मिले जहाँ वह गर्व से सिर उठा सके और मुस्कुरा सके। आज मैं एक ब्रिगेडियर के तौर पर नहीं, बल्कि इनके ‘बड़े भाई’ या ‘पिता तुल्य’ सेवक के रूप में खड़ा हूँ।
इनकी यह हंसी ही मेरी प्रेरणा है और यही मुझे थकने नहीं देती। हम एक ऐसे भारत का निर्माण कर रहे हैं जहाँ हर बच्चा इसी तरह खिलखिला सके।