संस्कार और शिक्षा – एक नए भारत की पौध

November 29, 2020

इन बच्चों की आँखों में मुझे भारत का वह सुनहरा कल दिखाई देता है, जिसका सपना हम सब देखते हैं। जब मैं इन नन्हें ‘ऋषिकुमारों’ और विद्यार्थियों के बीच खड़ा होता हूँ, तो मुझे अनुभव होता है कि देश की असली शक्ति केवल हथियारों में नहीं, बल्कि हमारी नई पीढ़ी के चरित्र और संस्कारों में है। ‘नवभारत चेतना संस्थान’ का प्रयास है कि हम आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी सनातन संस्कृति और नैतिक मूल्यों (Values) को भी जीवित रखें। हम एक ऐसी पीढ़ी तैयार करना चाहते हैं जो न केवल ज्ञान में श्रेष्ठ हो, बल्कि जिसके भीतर राष्ट्रभक्ति और अनुशासन कूट-कूट कर भरा हो।

ज्ञान और संस्कार की छाँव में, पल रहा है भारत का भविष्य।

एक सैनिक के तौर पर मैंने सीमाओं पर देश की रक्षा की है, लेकिन अब मेरा दायित्व इन ‘नन्हें सिपाहियों’ को सही दिशा दिखाना है। ये बच्चे ही कल के भारत के कर्णधार हैं। इन्हें सही मार्गदर्शन, स्नेह और शिक्षा देकर सशक्त बनाना ही मेरा मिशन है। जब शिक्षा के साथ संस्कारों का मिलन होता है, तभी एक श्रेष्ठ नागरिक का निर्माण होता है। इन मासूम चेहरों पर यह मुस्कान और माथे पर यह तिलक इस बात का प्रमाण है कि हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं—एक ऐसे भारत की ओर, जो अपनी जड़ों से जुड़ा हो और आसमान छूने का हौसला रखता हो।