“उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री और ओजस्वी नेतृत्व के धनी श्री योगी आदित्यनाथ जी से यह भेंट केवल एक शिष्टाचार मुलाकात नहीं, बल्कि ‘नये भारत’ के निर्माण के लिए एक सार्थक संवाद है। जिस ऊर्जा, अनुशासन और निस्वार्थ भाव से वे जन-सेवा कर रहे हैं, वह हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। ‘नवभारत चेतना संस्थान’ के विजन और हमारे कार्यों को उनके समक्ष रखना और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करना हमारी संस्था के लिए गौरव की बात है। यह तस्वीर इस विश्वास को दृढ़ करती है कि जब सरकार की शक्ति और सामाजिक संस्थाओं का समर्पण मिल जाता है, तो बड़े से बड़ा बदलाव संभव है।”
“हमारे हाथों में यह पवित्र ग्रंथ (पुस्तक) इस बात का प्रतीक है कि भारत का विकास हमारी सांस्कृतिक नींव और नैतिक मूल्यों पर ही टिका होना चाहिए। मुख्यमंत्री जी के साथ चर्चा के दौरान हमने यह संकल्प साझा किया कि ‘अंत्योदय’ (समाज के अंतिम व्यक्ति का उदय) ही हमारा परम लक्ष्य है। एक पूर्व सैनिक के रूप में, ऐसे सशक्त नेतृत्व का साथ मिलना मेरे मनोबल को बढ़ाता है और यह सुनिश्चित करता है कि हम भारत को एक ‘विकसित’ और ‘आत्मनिर्भर’ राष्ट्र बनाने की दिशा में सही कदम बढ़ा रहे हैं।”